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Showing posts from November, 2022

~ तुम रुक किधर गए ~

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अरे ! तुम तो साथ ही थे रुक किधर गए ? हमने तो हाथ भी पकड़े थे छूट कैसे गए ?  कह रहे थे तुम्हें हमसा कोई नहीं मिला  तुम लौट रहे थे , फिर उनके बुलाने पर रुक क्यों गए ? हम तो सायं से ही समझाने लगे थे अपने रिश्ते को  तुम सुन रहे थे , फिर गहरी नींद से उठ कैसे गए ? अरे अरे तुम सुनो तो !  ख़्वाब जो तुम देख रहे थे  कुछ पूरे हुए भी ? या सारे ही टूट गए ? याद है ! वक्त की रेल में तुम थोड़ी देर से चढ़े  हम उसी डिब्बे में रहे और तुम उतर भी गए ? अब क्या अब बस लिख रहा हूं ! कलम थकी नहीं है तुम बताओ कभी पढ़ते भी हो , या भूल गए ? अरे... बहुत दूर निकल आए हम चलते चलते ! रुको वापस आता हूँ , मगर तुम बताओ ? हम सच में आज निकल आए , या तुम वहीं रुक गए  अरे ! तुम तो साथ ही थे , रुक किधर गए ?                                                               ~ अनिल

~ मन ~

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दिल यहीं है धड़कन कहीं और , प्रेम यहीं है तड़पन कहीं और ! डर डर के भरते हैं सांसें अधूरी , मृत्यु यहीं है जीवन कहीं और ! वक्त न थमता एक पल के लिए , जवानी यहीं है बचपन कहीं और ! दिमाग़ में चलते हज़ारों ख्याल , शरीर यहीं है मन कहीं और !                                                                    ~ अनिल

छोटा सफ़र 🤝

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                          एक छोटा सफ़र जो शुरुआत हुआ एक ऐसे जगह से जहां से हमें उम्मीद तक नहीं थी । पर कहते हैं ना की जब कुछ लोगों का लाइफ में मिलना लिखा होता है न तो कहीं न कहीं मिल ही जाते हैं । मेरे इस छोटे से सफर की भूमिका तो नहीं पता थी लेकिन इस छोटे से सफ़र में किसी एक ऐसे अनजान शख्स से मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी । हमारी मुलाकात बस कुछ समय के लिए हुई और वही फिर हम लोग उस मुलाकात के बाद अपने अपने रास्ते । सोचने की बात ये थी की एक ऐसी लड़की से मुलाकात हुई जो मेरे लिए बिल्कुल अनजान थी । शायद वो हमें देखे हुए थे और हम उन्हें नहीं देखे थे ।                     पता नहीं हम लोग किस वजह से बात करने लगे इस बात का पता हमें पता नहीं चला । अब हमारी बातें होने लगी कुछ समय के लिए फिर कुछ दिन बाद हम लोग एक अच्छे दोस्त समझ कर बातें करने लगे । मेरे हिसाब से अगर आज के दौर में देखा जाए तो हर रिश्ते में कभी न कभी कुछ कारणों से रुकावट आती हैं । लेकिन इसका मतलब बदल ज...