विद्यार्थी जीवन एक संघर्ष ...🤔✍️


आज़ मन सुबह से बेचैन है... अब ये जिंदगी, लोग और रिश्तों ने मुझे खामोश कर दिया है। मां बाप के उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के गम से दुःखी हूं। वर्ष, महीना व दिन सब नगण्य साबित हो चुके हैं... रविवार लोगों के लिए खुशियां लेकर आता है परंतु मेरे लिए यह दिन अत्यंत बोझ एवं व्यर्थ होता है...!

सरकारी नौकरी एक ऐसी महबूबा है जो लाख जतन करने पर भी जल्दी हाँथ नहीं आती। एकतरफ लड़कों का जवानी लच रहा है तो दूसरी ओर मां बाप की उम्मीदें धुंधली हो रहीं हैं। 

बेहद लम्बे अरसे से जीवन में कुछ भी एक तारतम्य में नहीं घट रहा है। अतीत में मुझे कहीं से कोई प्रेरणा नहीं दिखती..वर्तमान तो है ही उलझन भरा। परिवर्तन के नाम पर केवल उम्र का नम्बर बढ़ा है। वक्त इतने तीव्र गति से भागा कि मैं स्वयं को देख-समझ नहीं पाया। आज निराशा एवं कई पछतावे हैं....✍️



                                                                                        ~अनिल...✍️


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