मुलाकात 🤝


                                           मुलाकात का भी अपनी जगह एक विशेष महत्व है, चाहे वो दिल का दिल से या फिर रूह का रूह से ,मुलाकात का अपना एक अलग स्थान है और एक अलग आनंद है । मुलाकात के बाद कुछ चीजों का हमे इल्म रहता है जिसे हम उस समय बोल नही पाते हैं,  अमूमन मुलाकात का मजा लंबे अरसे बाद मिलने से होता है क्योंकि तब तक हमे एक दूसरे से कहने बताने के लिए  बहुत सारी बातें हो जाती हैं।
                                           अलार्म की घण्टी बजी तो आंखों ने एक और नया सबेरा देखा, लेकिन आज न तो सूरज दिख रहा था और  न ही उसकी किरणें  ,मतलब आज आसमान पर बदल छाए हुए हैं। मैं तैयार हुआ और घर से बाहर निकला तो देखा आज मौसम भी काफी हसीन है, घर के पास में ही एक बगीचा था , जहाँ जाना मुझे काफी अच्छा लगता था ,मैं अपने कदमों को धीरे धीरे बढ़ाया और उधर चल दिया , हवा भी धीरे धीरे चल रही थी, और मन भी प्रसन्न था । 
                                अक्सर हम कभी बेवजह काफी खुश हो जाते हैं ,जिसका कारण हमें भी पता नही होता , वैसे यूँ ही वेवजह मुस्कुराने का अपना अलग मजा है ।पकडंडियों का अनुसरण करते हुए बगीचे में जैसे ही मैने प्रवेश किया, तो दूर से देखा की एक अजनबी आज उस पेड़ के नीचे बैठा है,जहाँ मैं बैठा करता था, मैं धीरे से आगे बढ़ा और वहां जाकर मैं चौक गया, आज कई वर्षों बाद उनको देखा, शायद उन्हें पता था कि मैं यहीं आने वाला हूँ, मुझे समझ नही आ रहा था कि क्या बोलू ,कुछ देर हम एक दूसरे को देखते रहे, फिर उन्होंने बैठने के लिए कहा , एक बहाने की तलाश थी मुझे उनसे बोलने की ,लेकिन उन्होंने ही पूछ दिया ,किस्मत भी कितनी अजीब होती हैं न ,कब किसको कहाँ मिला दे पता नही रहता , मुझे कुछ समझ नही आ रहा था की क्या जवाब दूँ। कभी कभी कुछ सवाल इतने उलझे हुए रहते हैं कि जवाब समझ नही आता कि क्या दूँ।  मैंने धीमे स्वर में कहा कि कम से कम इसी बहाने एक मुलाकात तो हुई ।
                                 ,कुछ देर तक हम एक दूसरे से बात करते रहे कुछ सवाल वो पूछते तो कुछ हम और उनके उत्तर देने का अंदाज काफी पसंद आया , आज वो पुराने दिन याद आ गए थे । आज भी उनकी झुकी हुई नजरें, और खुले हुए बाल मुझे काफी पसंद थे, हवा उनके बालों से खेलती हुई उनको परेशान कर रही थी, और वो अपने बालों को बड़ी सहजता से सवांर रहे थे, काफी बातें थी अभी भी दिल मे उनसे कहने को थी पर पता नही था कि उन्हें पसंद आये या न आये । क्या होता है की मुलाकात में भी हम पूरी बातें कर नही पाते न ही हम खुल के सब बोल सकते है, पर आज भी हम दोनो हमेशा की तरह वैसे ही मिले, अब दोनों उठकर साथ साथ घर की ओर चलने लगे, कुछ ही दूर से उनका रास्ता अलग होना था ,मैने कहा इस बार कोई खत नही आया , उन्होंने कहा खत से ज्यादा मुलाकातें याद रहती हैं, फिर भी हम आपको खत लिखा करेंगे । वैसे मुझे भी किसी के खत का इंतजार रहता है,पर उनको समय नही है ,मैंने कहा आपकी बात सही है वक़्त का सही उपयोग हम नही कर पाते , कुछ देर चलते चलते हम दोनों के रास्तों ने भी एक दूसरे का साथ छोड़ दिया , तो अन्ततः हमे भी एक दूसरे से अलग होना था ,हमने अपनी अगली मुलाकात का समय किस्मत को सौंप दिया औऱ घर की ओर चल दिये,

कभी कभी कुछ लोगों से बिछड़ना अच्छा नही लगता,क्योंकि आपकी जिंदगी में उनकी अहमियत होती है, मुलाकात को बस एक बहाना होता है एक दूसरे को देखने का ,क्योंकि उस दौरान तो हम सारी बात कर नही पाते क्योंकि समय का अभाव रहता है,  मुलाकातों की भी एक रूपरेखा होती है क्योंकि उस निर्धारित समय मे हमे कई सारी बातें करनी होती है,  मैं धीरे धीरे आगे घर के करीब पहुंच रहा था, कुछ बाते रह जाती हैं  कहने को तो , कुछ बातें मिल जाती है सोचने को ,इन तमाम यादों के बीच मन मे एक खुशी थी क्योंकि बहुत समय पश्चात मुलाकात हुई,।
                                        पता नही क्यों पर मैने कुछ सवालात मन मे रखे थे अगली मुलाकात के लिए, जैसे कि क्या उन्हें भी हमारा ख्याल रहता है? क्या हमारी भी अहमियत होगी उनकी जिंदगी में?    ऐसे कई सवाल सजों रखे थे मैने अगली मुलाकात के लिए ।मैं अपने घर पहुंच चुका था, और बाहर रखी एक मेज पर बैठ गया और सोचता रहा।

                                                                ANIL ROY

अपनी कलम से ...........✍️✍️🙄

Comments

Popular posts from this blog

तुम लौट आओगे शायद...!

सबके हिस्से में नहीं आता !