मुझे बताना है तुम्हें ...
मुझे बताना है तुम्हें कि ,
अब बदल गया हूं मैं
प्यार बेसक आज भी करता हूं मैं ,
जताना भूल गया हूं मैं
गुस्सा आज भी आता है तुम पर ,
लेकिन इस गुस्से को दबाना सिख गया हूं मैं
तुमसे बात करने की आज भी तलब उठती है ,
मगर उस तलब को अपने अंदर दफ़न करना सिख गया हूं मैं ,
आज भी तुम्हारी परवाह होती है मगर
बेपरवाह होना सिख गया हूं मैं ,
दिल में आज भी दर्द होता है ,
मगर उस दर्द को छुपा कर मुस्कुराना सिख गया हूं मैं ...
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