कुछ सवाल..🤔


कितनी कश्मकश से भरी हुई है ज़िंदगी , जब तक सही ढंग से समझ आती है , तब तक वक्त एक रेल की तरह गुजर जाता है , और पटरियों पर रह जाती हैं केवल हवाएं , और वो हवाएं बस एक ही सवाल पूछती हैं कि क्या ज़िंदगी को अपने लिए जिया मैने  ? या हवा के बहाव में बहते हुए किसी रेल की तरह गुजर गया , और कभी ठहर कर देखा ही नहीं कि मैं क्या हूं  ? ख़ुद को पाने के लिए जरियों को समझते हुए , शायद हम रास्तों में ही खो जाते हैं  , क्यूंकि ठहरना हमें सिखाया ही नहीं गया । बस सीखा है तो सिर्फ भागना , हासिल करना , जीतना , बिना ये समझे की मेरे एहसासों पर भार रखा जा रहा है । देखो ज़िंदगी में लड़ना , भागना तो पड़ेगा ही । ज़िंदगी जितना कहने में सरल है , उतना है नहीं इसलिए जीवन में संतुलन लाना बहुत जरूरी है ।

आज कल हर किसी का सपना होता है कि  इसमें अपनी लाइफ का एक अलग रोल हो । एक अलग रोल का मतलब ये नहीं है कि आप अपनी खुशहाल जिंदगी के पलों को छोड़कर कहीं दूर निकल जाओ या फिर अपने आप को बदलने की कोशिश करो । आज के दौर में देखा जाए तो हर किसी के लाइफ में , किसी न किसी एक शख्स का हाथ होता है । जिससे बात करके लगता है कि अपनी समस्याओं को एक नई राह मिल गई हो । आज इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई कहीं न कहीं बिजी है । आज कल लोगों को जानना सामान्य हो गया है लेकिन लोगों को  समझ पाना कहीं ज्यादा मुश्किल है । 
 
                           जिंदगी कभी कभी ऐसे मोड़ में ले आकर खड़ी कर देती है , उस वक्त मानों सारे रास्ते धुंधले नज़र आते हैं । कुछ ऐसे सवाल पूछ बैठती है की वास्तव में हम अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाएंगे लेकिन फिर भी हम अपनी सारी समस्याओं को भूल कर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं कि , चलो आज नहीं तो कल अपना भी वक्त आएगा । इसी उम्मीद से हम अपने आप को एक बेहतर दिशा में ले जाने को प्रयास करते हैं ।हमारे जीवन में बहुत उतार चढ़ाव आते हैं लेकिन उससे हमें सीखना है । इस भागदौड़ भरी जिंदगी से जब आगे निकल कर सोचते हैं तो बहुत अधूरा अधूरा सा लगता है । वक्त के धूल ने सभी चहरे अनजान कर दिए । 


कुछ लाइनें ,


खुशियां कम अरमान बहुत हैं  ,
जिसे भी देखो परेशान बहुत है  !

करीब से देखा तो निकला रेत का घर  ,
मगर दूर से  ,  इसकी शान बहुत है   !

कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं ,
मगर आज  , झूठ की पहचान बहुत है  !

मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी ,
यूं तो कहने को इंसान बहुत हैं   !


विशेष :– 🔸   कुछ तो बाकी रहने दे " ऐ ज़िन्दगी
                          और कितना बदलूं , तुझे समझने के लिए ..?

             🔸    या तो " तुम "  या फिर  " कोई नहीं  ",
                                        ये सिर्फ़ कहने की बात है .....?
                      बेपरवाह तो हम थे ही " ऐ इश्क़ "
                            तूने बहकाया और हम बहकते चले गए ..?            


                                             अपनी कलम से........✍️✍️

Comments

Popular posts from this blog

तुम लौट आओगे शायद...!

मुलाकात 🤝

सबके हिस्से में नहीं आता !