कुछ सवाल..🤔
कितनी कश्मकश से भरी हुई है ज़िंदगी , जब तक सही ढंग से समझ आती है , तब तक वक्त एक रेल की तरह गुजर जाता है , और पटरियों पर रह जाती हैं केवल हवाएं , और वो हवाएं बस एक ही सवाल पूछती हैं कि क्या ज़िंदगी को अपने लिए जिया मैने ? या हवा के बहाव में बहते हुए किसी रेल की तरह गुजर गया , और कभी ठहर कर देखा ही नहीं कि मैं क्या हूं ? ख़ुद को पाने के लिए जरियों को समझते हुए , शायद हम रास्तों में ही खो जाते हैं , क्यूंकि ठहरना हमें सिखाया ही नहीं गया । बस सीखा है तो सिर्फ भागना , हासिल करना , जीतना , बिना ये समझे की मेरे एहसासों पर भार रखा जा रहा है । देखो ज़िंदगी में लड़ना , भागना तो पड़ेगा ही । ज़िंदगी जितना कहने में सरल है , उतना है नहीं इसलिए जीवन में संतुलन लाना बहुत जरूरी है । आज कल हर किसी का सपना होता है कि इसमें अपनी लाइफ का एक अलग रोल हो । एक अलग रोल का मतलब ये नहीं है कि आप अपनी खुशहाल जिंदगी के पलों को छोड़कर कहीं दूर निकल जाओ या फिर अपने आप को बदलने की कोशिश करो । आज के दौर में देखा जाए तो हर किसी के लाइफ में , किसी न किसी एक शख्स का हाथ होता है । जिसस...