तुम और मैं
तुम और मैं
समुंदर और आसमान जैसे हैं ,
जो कहीं दूर जाकर मिलने की उम्मीद देते हैं ,
पर कभी मिल नहीं पाते ......
तुम और मैं
उस कविता जैसे हैं ,
जो एक लेखक उसे आज भी पूरी करने की
कोशिश में है .......
तुम और मैं
नींद और सपना जैसे हैं ,
कब आंख खुल जाए पता ही नहीं
लेकिन फिर भी
बिताए हुए पलों में जीने की कोशिश करते हैं.......
तुम और मैं
वो एक रेल की पटरी जैसे हैं ,
करीब तो बहुत हैं लेकिन मिलना नसीब में ही नहीं .....
विशेष :_सोचता हूं
" कि क्या कमी रह गई ,
क्या जितना था वो काफ़ी नहीं था ...."
#हम दो लोग ❣️🤝💌
अनिल ...✍️
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