कल भी तुम थे , आज भी तुम हो ..✍️✍️
कहां गलत था मैं ,
क्या उस अनजान शख्स पे भरोसा करना मेरी गलती थी या उस छोटी सी मुलाकात को इश्क़ समझ लेना मेरी गलती थी । लगता है मेरे और भगवान के बीच में वो लाइन ही कटी हुई है , जिस पर वो लोगों की सुनता है । उसके कानों तक तो मेरी आवाज कभी पहुंच ही नहीं पायी , या फिर शायद उसने मेरी कहानी का यही अंजाम सोचा था । आज जब पलट कर देखता हूं तो सब धुंधला धुंधला सा नजर आता है । वक्त के धूल ने सभी चहरे अनजान कर दिए , पर वो चेहरा आज भी उतना ही साफ है , जिसकी आंखों ने मैने कभी सच्चा प्यार देखा था । मेरे हमसफ़र का चेहरा ....मैं जानता हूं ये कहानी अधूरी है और शायद कुछ कहानियों का अधूरापन ही उनका अंत होता है । सब कुछ तो कभी पूरा नहीं होता , लेकिन पूरा भी कभी अधूरा रह जाता है .❓
बस कुछ लाइनें लिख दी हमने अपने एक छोटे सफ़र के नाम ...
हमारे दिल की चाहत ,
कल भी तुम थे
आज भी तुम हो
मेरी ज़रूरत ,
कल भी तुम थे
आज भी तुम हो
तुमने तो मुझे कब का भुला दिया ,
मेरी आदत
कल भी तुम थे
आज भी तुम हो
हमने ना जाने तुमको कितना प्यार किया ,
मेरी इबादत
कल भी तुम थे
आज भी तुम हो
बेखबर बनते हो खबर होके भी ,
मेरी किस्मत
कल भी तुम थे
आज भी तुम हो
विशेष :— वक्त वक्त की बात है ,
कोई नफरत देकर प्यार पाता है ...!!
कोई प्यार देकर भी अकेला रह जाता है ...!!
यूं तो कभी प्रेम पत्र नहीं लिखा तुझे
पर अक्सर ये सोचता हूं कि , लिखता भी
तो क्या लिखता ..❓
क्या प्रेम कभी पूरी तरह से शब्दों में
अभिव्यक्त हो सका है । भला बातों का
अव्यक्त रह जाना ही तो बहुत बड़ी
कमजोरी रही है __प्रेम की ....
___अपनी कलम से ..✍️✍️
Verry nice..
ReplyDeleteदिल से शुक्रिया ...🥳
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