एक अनजान शख़्स ..🤔


                       कुछ दिनों पहले की बात है , ठंड के मौसम में सुबह का वक्त था । हम बस यूंही सड़क में टहलने के लिए निकले थे  । बस ऐसे ही टहलते – टहलते हम कुछ दूर निकल गए थे , तो हम सोचे की अब घर की तरफ़ चलना चाहिए । क्योंकि हमको कॉलेज भी जाना था , और उस समय लगभग ८:३० बज रहे थे । तो हम उधर से ही लौटते वक्त हमने देखा की सड़को पर खामोशी सी छाई हुई थी । फिर अचानक हमारी नज़र एक शख्स के ऊपर पड़ी । सिर्फ़ हम उनके तरफ बस एक ही बार देखा तो मेरे मन में एक सवाल परेशान कर रहा था की हम इस शख्स को कहीं न कहीं देखे हैं ।
                                        शायद उनकी भी नज़र हम पर पड़ी हुई होगी ये हमें नहीं पता । लेकिन जब से हम उनको देखे तो मेरे मन में यही सवाल चला रहा था की हम जो इस शख्स को देखे हैं तो क्या सच में वही है या फिर कोई और होगा , यही सवाल शायद उनको भी परेशान कर रहा होगा की क्या वो वही लड़का होगा जिससे हम पहले भी मिल चुके हैं कहीं ,

बस यही मेरे मन में चलता रहा और हम धीरे धीरे अपने घर की तरफ चल दिए । अब हम अपने मन में यही सोचे की क्या हमको ये बात उनसे कहना चाहिए या नहीं , और शायद वोभी सोच रहे थे की अगर उस लड़के से मुलाकात होती है तो हम पूछे की वास्तव में वहां पर तुम्ही थे या फिर कोई और था । अब हम लोगों की मुलाकात तो रोज होती थी  । लेकिन हम लोग ये नहीं कह पा रहे थे कि आपको हमने देखा है ।
                                   ऐसे करते करते समथिंग दो तीन दिन गुजर चुके थे । अब हम सोचे की क्यूं ना हम इस बात जिक्र करें की हमने आपको कहीं देखा है । फिर एक दिन अचानक ही हम ये सवाल पूछ बैठे की सुबह जो हम तुम्हारे घर के रास्ते से गुजरते वक्त आपको देखा था तो क्या वहां पर तुम्ही थे या नहीं । उन्होंने कहा हां हम ही थे , अब वो कहने लगे की ये बात हम भी बहुत दिनो से सोच रहे थे कि बोलने के लिए लेकिन हम कन्फ्यूज थे कि क्या तुम्ही होगे या नहीं । यही सिलसिला चलता रहा कुछ दिनों तक । वो एक पहली मुलाकात थी जिससे हमें उस खामोश गलियों से थोड़ा अलग ही अपनापन लगने लगा । अब मेरे अंदर एक सवाल ये भी तंग कर रहा था की अगर हम उस गली से गुजरेंगे तो क्या उनसे फिर से मुलाकात होगी या नहीं। 
                     अब क्या मैं इस मुलाकात को इश्क़ मान लूं या फिर इसे एक तरफा इश्क़ कह दूं अक्सर हमारे सबके मन मे किसी से एक मुलाकात के बाद ऐसी भावनाएं आती है, उस समय ये हमारे ऊपर हावी रहता है , और हम उस समय कुछ निर्णय गलत ले बैठते हैं , और फिर उसे चाहते हुए भी अपने दिमाग से नही हटा सकते हैं, हमने भी ऐसी गलती की, मैंने उस मुलाकात को इश्क़ समझ बैठा और एक आश सी लगी रहती थी मन मे दुबारा मुलाकात की दुबारा रूबरू होने की, यूँ कह लीजिए कि मुझे उनसे इश्क हो गया था । कितना आसान है न कि हम एक मुलाकात को इश्क़ समझ बैठे क्या उन्हें भी ऐसा लगता होगा, किसी ने कहा था कि ये चीजें किसी एक तरफ ही होती हैं अगर ये चीजें दोनों तरफ हो जाएगी तो फिर एक मुकम्मल इश्क़ हो जाएगा । कभी भी न मैने और न ही उन्होंने एक दूसरे से इश्क़ की बात की , वास्तव में उन्हें था या नही पता नही पर मैने कभी जताया नही,और जब तक जताया तब तक देर हो चुकी थी, । अक्सर हम कुछ चीजों में देरी कर देते है कि शायद सब सही हो जाय, पर वास्तव में ऐसा होता नही है, हम किसी के ऊपर टूटकर भरोसा करने लगते है, कभी सोचते नही की क्या वो भी ऐसा करते होंगे,यह एक मानसिक प्रक्रिया है आपकी सोच जरूरी नही है कि सामने वाले कि सोच से मेल खाती हो, हो भी सकती है और नही भी ।

वैसे कितना अजीब होता है ये इश्क़ का सफर इसमें दो शख्स अनजान होकर मिलते हैं और धीरे धीरे इतना आगे निकल जाते हैं कि पता नहीं चलता की कब जान बन गए और ये होता ही है क्यूंकि इंसान जब भी किसी से बातें करता है तो अपने भविष्य को नहीं देखता की आगे चल के क्या होगा । ख़ैर एक तरफा वाला इश्क़ भी बड़ा कमाल का होता है इसमें इंसान अपनी खुशियां तो हैं ही लेकिन जो अगले इंसान को खुश देख के जो अपने आप में खुशी होती है ना उसकी तो बात ही अलग है । उसके ना जाने बिना जो अपने आप में खुश होना तो दिल को सुकून सा मिलता है तो बहुत अच्छा लगता है । ये तो हमेशा हुआ की एक इंसान परेशान होता है बात करने के लिए और एक इंसान फिक्र तक नहीं रहती है की अगला इंसान क्या चाहता है अगर यही सोच दोनों तरफ़ से हो तो फिर वो इश्क़ एक तरफा वाला नही कहलाएगा ।

लाइफ में कभी कभी ऐसा भी होता है कि हर सपना जो हम देखते हैं, हर ख़्वाहिश जो हम करतें है वो पूरी नहीं हो पाती। मगर ख़्वाब ना पूरा होने के डर से हम ख़्वाब देखना तो नहीं छोड़ सकते ना? ख़्वाब और ख़्वाहिश इंसान के जीने वजह देती हैं । जिनके सहारे इंसान जिंदा रहते है। अगर किसी की ज़िंदगी में कोई ख़्वाब नहीं है तो फिर ऐसी ज़िंदगी जीने क्या भला । ख़्वाब पूरा ना हो वो तो भाग्य की बात है। लेकिन किसी को पाने की ख़्वाहिश का ना पूरा हो पाना तो हमारे प्यार में कमी होने से ही होता है !

                         ये शब्द मेरे लिए एक कहानी जैसा था, जैसे एक ही पल में बहुत कुछ छीन सा गया हो । गौर कीजिए कि, एक पल था जिसमे मुझे इश्क़ हुआ उस शख्स से जिसे पहले कभी मिला नही था,  हम अक्सर ऐसी गलतियां करते है या यूं कह सकते है कि हमसे ऐसी गलतियां हो जाती है कि कुछ जगहों पर हम दिमाग़ और हालात से ज्यादा दिल को तवज्जो देते है हमारे ख्याल कुछ समय के लिए अलग ही दुनिया सजा लेते है और हम उसी दुनिया मे जीने की कोशिश करने लगते है ,पर वास्तविकता बिल्कुल इससे पर है, ऐसा कहते हैं ,की इश्क़ शब्द ही एक प्रकार से अलग ही दुनिया है , इसमे ख्यालों ,,एहसासों ,चाहतों, मुलाकातों, और नजदीकियों का महत्व है, इसकी बुनियाद विश्वास पर टिकी होती है, । कुछ कहते है दो के बीच मे किसी तीसरे इंसान के आ जाने से अक्सर रिश्तों में दरारें आती हैं , हां ये बात भी सही है लेकिन हम ये भी कह सकते हैं कि जो इंसान जनता है की इश्क़ का एहसास क्या होता है तो वो इंसान तीसरे इंसान को आने को वक्त ही नहीं देगा । 
                       

कुछ दिनों का सफर कुछ इस अंदाज से गुजरा मेरा 🙁🙁

 ये दिन और ये बीते हुए लम्हें शायद हमारे रूह से रूबरू करते रहेंगे ।

एक बात और तुम्हारी मुस्कुराहट हमेशा हमें मुस्कुराने कि वजह देंगी ।

वो तुम्हारा बेवजह मुझे  देखने का अंदाज हमेशा सताएगा ।




                  कभी कभी हमें एक अनजान शख्स से अलग ही अपनापन हो जाता है , और हम इसे इश्क़ समझ बैठते हैं । ये जानते हुए भी कि , वो एक अनजान शख्स कभी हमारा नहीं हो सकता है , लेकिन तब भी हम उसको इतना इंपोर्टेंस देते हैं कि जैसे वो हमसे कभी दूर ही न हो ..।


Note :- Please don't take my words to heart 🤔❤️


अपनी कलम से ...✍️✍️✍️

Comments

  1. आप बहुत अच्छा लिखते हैं और हम यही उम्मीद करते हैं कि आपकी कोशिश हमेशा आगे बढ़ती रहे ... 🙏🙏🙏🙏🙏

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