वजह..🤔
एक दिन ऐसा वक्त आया कि हमारे कुछ एहसास यही कह रहे थे की क्यों न हम अपने दिल की बात रखें , लेकिन डर इस बात का भी लग रहा था की , क्या हम जो सोच रहे हैं उनके बारे में तो क्या वो भी यही सोचते होंगे या नहीं ।कभी कभी किसी के सामने अपने दिल की बात न कह पाना लोग मजबूरी समझ लेते हैं या फिर कमजोरी । और ये सिलसिला बस यूंही चलता गया ,इंतज़ार के दिन सालों में कब तबदील हुए ,इसका एहसास तो उन बिखरे पन्नों ने याद दिलाए ,जिसके हर पन्नों में लिखे शब्द सिर्फ़ उनके लिए थे , पर ऐसा लगता है कि , झूठे से थे वो वादे , इस इश्क़ के इंतज़ार की घड़ी कभी थमी नहीं । जो इश्क़ था वो रेत की भांति इन हाथों से निकल गया । मैंने अपनों को ही दूर जाते देखा उसे थामने की कोशिश की पर उसके साए ने भी एक बार पलट कर नहीं देखा ...🤔 🥀 ...