ठहराव ...🤔
कितनी कश्मकश से भरी हुई है ज़िंदगी , जब तक सही ढंग से समझ आती है तब तक वक्त एक रेल के तरह गुजर जाता है .! और पटरियों पर रह जाती हैं केवल हवाएं , और वो हवाएं केवल एक ही सवाल पूछती हैं ! कि क्या ज़िंदगी को अपने लिए जिया मैंने , या बहाव में बहते हुए किसी रेल की तरह गुजर गया , और ठहर कर देखा ही नहीं की में कौन हूं ? खुद को पाने के जरियों को समझते हुए , शायद हम रास्तों में ही खो जाते हैं ! क्यूंकि ठहरना तो हमें सिखाया ही नहीं गया , बस सीखा है तो भागना , जीतना , और हासिल करना ..! बिना ये समझे की मेरे एहसासों पर भार रखा जा रहा है , इस एक दौड़ का जिसमें सब भाग रहे हैं ..! बिना ये सोचे कि ये रास्ता लेकर कहां जा रहा है , लेकिन फिर भी हम उन्हीं रास्तों को सहारा लेकर हम आगे बढ़ते हैं ..? #जहन में गूंजते कुछ सवाल ज़वाब .....✍️