दूरियों का एहसास ❣️🙁
हमारी कहानी कुछ ऐसे शुरू हुई कि शायद हम तुम्हारे यहां ना आते ना ही हमको पता चल पाता की मेरे ही ख्वाबों में वो भी उलझी रहती है । पहले दिन जब वहां पहुंचा तो अपने अंदर छुपे थोड़ा अकेलेपन के बारे में सोच रहा था । तो कुछ दिन बाद बस हुआ यूं की उनकी नजर भी थोड़े समय के लिए मेरे पर आ रुकी और देखते ही उनके मन कुछ चल रहा था तो बोलने की कोशिश कर रहे थे फिर कुछ देर वो मेरे आंखों से ओझल हो गई और ओझल होने का कारण भी था कि वह अपने दर्द को छुपाने के लिए वो हमारे सामने आने के लिए थोड़ा सा शर्म महसूस कर रही थी तो इसलिए वो कुछ दिन मेरे सामने आने के लिए परेशान थी लेकिन वो अपने घर से थोड़ा सा दबाव महसूस कर रहे थे इसलिए वो सामने नहीं आ पा रहे थे । इससे पहले मेरी नजर उन पर पड़ी भी नहीं थी ये सवाल उनके भी दिमाक में चल रहा था कि हम क्यूं ना उनके सामने जाएं और अपने आप। में अकेलेपन कि जो कमी महसूस हो रही थी तो क्यूं ना दूर करें । फिर एक दिन सुबह मेरी नजर खुली और हम घर कि तरफ जाने कि कोशिश कर रहे थे फिर जब गए तो वो अपने घर का दरवाजा खोल के बाहर धूप लेते हुए बैठी हुई थी फिर जब हम इधर से गए तो मेर...